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नेपाल सद्भावना पार्टी
संघीय कार्यसमिति की बिस्तारित बैठक
६, ७, ८ कार्तिक २०७३


संघीय अध्यक्ष द्वारा बैठक में प्रस्तुत राजनीतिक प्रस्ताव ः
प्रस्तावनाः वि.सं. २०७२ आश्विन ३ गते को नेपाल की दुसरी संबिधानसभा का उपयोग कर देश की तीन बडी राजनीतिक पार्टीयां (नेपाली कांग्रेस, नेकपा (माओबादी केन्द्र) तथा नेकपा (एमाले) द्वारा संबिधानसभा में उनके सांसद संख्या के बल पर मधेशी सहित तमाम शोषित पीडित जनता के अधिकार को कुंठीत करते हुए जिस तरह से जबरन नेपाल का नया संबिधान–२०७२ घोषित किया गया, उसी प्रस्थान बिन्दु ने देश को अन्धकारमय राजनीतिक सुरुंग में ढकेल दिया ।

 नेपाल के शोषित पीडित एवं उपेक्षित मधेशी समुदाय सहित भेदभाव के शिकार सभी क्षेत्र, वर्ग एवं समुदायों को फिर से गुलाम बनाये रखने की शासक वर्ग के राजनीतिक नेताओं के कुटिल मनसाय के कारण देश की राजनीति दिशाहीन अवस्था मे पहुंच गयी है, जो किसी बिरान जंगल में दिग्भ्रमित यात्री की तरह सही राह की खोज में भटकती फिर रही है ।

यही कारण है की संबिधान जारी होने के बाद के पिछले एक वर्ष में तीसरी सरकार सत्ता में आ चुकी, तीन सरकारों के सत्ता में आने के बाद भी नया संबिधान कार्यान्वयन ंकी अवस्था सहज नहीं दिखायी देती है । वर्तमान संसद के तिनों हीं बडे दलों ने क्रमशः शासन सत्ता का नेतृत्व किया लेकिन मधेशीयों के संबैधानिक अधिकार को नहीं देने के विषय पर ये आन्तरिक रुप से एकजुट हैं तथा इन सवों ने अब तक मधेशवादी राजनीतिक दल तथा जनता को गुमराह कर ठगने का हीं काम किया है ।

दर्जनों मधेशी के शहिद होने तथा छः महिने से भी अधिक समय तक के चरणबद्ध अहिंसक संघर्ष का नजरअन्दाज करते हुए जिस तरह से शोषक वर्ग आगे बढ रहें हैं, वह इस देश की एकता तथा अखण्डता को अक्षुण्ण बनाये रखने की मधेशी जनता के चाहना तथा भावना दोनों हीं पर कुठाराघात है ।

संयुक्त लोकतान्त्रिक मधेशी मोर्चा तथा नेपाल सद्भावना पार्टी द्वारा संबिधान घोषणा के समय से हीं जोडदार रुप से उठायी जा रही संबिधान संशोधन के प्रस्ताव को बिभिन्न बहानों के बल से टालते हुए संबिधान कार्यान्वयन के कार्य को जिस ढंग से मनमानीपुर्वक तथा एकतरफा आगे बढाने के लिए बिगत की तरह हीं वर्तमान सरकार गृहकार्य कर रही है, वह इस वात का द्योतक है कि देश एक बार फिर से राजनीतिक मुठभेड की ओर आगे बढ रही है और इसका खामियाजा इस सुन्दरतम् देश और यहाँ के सिधेसाधे और भोलेभाले जनता को भुगतना पड रहा है और आगे भी पड सकता है ।

हमारा दृष्टिकोण ः 
संबिधान घोषणा होने से पहले भी तथा संबिधान घोषणा होने के तुरन्त बाद से हीं नेसपा ने वर्तमान संबिधान संशोधन का में १०९ सुत्रिय प्रस्ताव औपचारिक रुप से सुशिल कोइराला नेतृत्व की तात्कालिन सरकार एवं बाद की के.पी.ओली नेतृत्व की सरकार के समक्ष औपचारिक रुप से प्रस्तुत कर चुकी है । वह संशोधन प्रस्ताव हीं पार्टी की आधिकारिक अवधारणा है एवं देश के सहज राजनीतिक निकास के लिए यही सबसे उत्तम उपाय भी है ।

उन्ही संशोधन प्रस्तावों का संश्लेषित रुप संयुक्त लोकतान्त्रिक मधेशी मोर्चा का ११ सुत्रिय माग में भी उल्लेख है और उसमे भी हमारी सहभागिता तथा सहमति होने के कारण इसी आधार पर यथाशिघ्र संबिधान संशोधन कर देश को राजनीतिक सहमति तथा अग्रगमन की ओर आगे बढाने की आवश्यकता है । नेसपा की यही आधिकारिक और संविधान संसोधन सम्बन्धि अवधारणा है ।

स्थानिय निकाय पुर्नसंरचना ः
सरकार द्वारा गठित स्थानिय निकाय पुर्नसंरचना आयोग ने जिस तरह से स्थानिय निकाय के पुर्नसंरचना के प्रारम्भिक प्रतिबेदन में वर्तमान के ४०३५ स्थानिय निकाय के जगह सिर्फ ५६५ स्थानिय निकाय कायम करने का प्रस्ताव सार्वजनिक किया गया है, उस पर ब्यापक बिरोध होने के बाद बाध्य होकर ने.का., नेकपा एमाले तथा नेकपा माओबादी केन्द्र के सामुहिक निर्णय के आधार पर लगभग २५ वर्ष पुरानी इलाका की अवधारणा को पुर्नजीवित करते हुए इलाका के आधार पर स्थानिय निकाय गठन के लिए जो गृहकार्य आयोग द्वारा हो रहा है, पार्टी इसका घोर बिरोध करती है । यह लोकतन्त्र तथा संघीयता के मुल्य–मान्यता के बिपरित तथा इसके आत्मा पर कठोर प्रहार है । यह स्थानिय प्रतिनिधित्व को समाप्त करने एवं जनता को मूलभूत अधिकार से बंचित करने का षडयन्त्र है ।

पार्टी का यह मानना है कि इस से मधेशी समुदाय का राजनीतिक प्रतिनिधित्व अल्पमत मे पड जायगा तथा नीति निर्माण एवं महत्वपुर्ण कानुन बनाने से मधेशी एवं जनजाति बंचित हो जाएंगे । मधेशी जनता का राजनीतिक प्रतिनिधित्व एकवार फिर से घटा कर नगण्य तक में सिमित करने के लिए यह बहुत हीं खतरनाक षडयन्त्र है, जिसका पार्टी जोडदार बिरोध करती है । बर्तमान में इसे एक प्रमुख राजनीतिक मुद्दा के रुप मे उठाने आवश्यकता को महसुस करते हुए इस के पक्ष में व्यापक जनजागरण कर जनस्तर से इसका व्यापक विरोध होने की आवश्यकता है ।

 राजनीतिक दल, मतदाता नामावली तथा निर्वाचन आयोग सम्बन्धि संसद में बिचाराधिन प्रस्ताव सम्बन्ध में ः
निर्वाचन आयोग ने राजनीतिक दल सम्बन्धि कानुनलाई संशोधन र एकिकरण गर्न बनेको बिधेयक २०७३, मतदाता नामावली सम्बन्धि कानुनलाई संशोधन र एकीकरण गर्न बनेको बिधेयक २०७३ तथा निर्वाचन आयोगको काम कर्तब्य र अधिकार सम्बन्धि कानुन संशोधन र एकीकरण गर्न बनेको बिधेयक २०७३,  संसद मे पेश की है जिस पर सैद्धान्तिक छलफल के बाद इस मे आवश्यक संशोधन प्रस्ताव दर्ता कराने के लिए एक निश्चित समय सिमा दिया गया था । इस निर्धारित समय के भितर ने.का., नेकपा एमाले एवं नेकपा माओबादी केन्द्र के सांसदों ने जिस प्रकार का संशोधन प्रस्ताव दर्ता किया है वह छोटी राजनीतिक दलों के अस्तित्वको समाप्त करने के लिए काफी है ।

संशोधन प्रस्ताव में समानुपातिक बिधि अनुसार के निर्वाचन प्रणाली मे सिट प्राप्त करने के लिए कम से कम ३% मत का थ्रेश होल्ड, नयाँ राजनीतिक दल दर्ता करने के लिए ५०० के जगह पर दश हजार मतदाताओं का हस्ताक्षर अनिवार्य किया जाने की ब्यवस्था लगायत अन्य कई महत्वपुर्ण निर्वाचन सम्बन्धि कानुन मे परिवर्तन के पक्ष में तिनो ही बडी राजनीतिक दल तयार दिखता है ।

अगर यह संशोधन प्रस्ताव संसद से पारित हुआ तो इसका सबसे बडा घाटा मधेशवादी दलों को होगा एवं इस से मधेशी, दलित एवं जनजातियों की मुखरीत हो रही आवाज को नियन्त्रित किया जायगा । यह लोकतान्त्रिक शासन पद्धती, गणतन्त्र एवं बहुदलिय शासन ब्यवस्था के मूल्य एवं मान्यता के बिपरित तथा निर्दलियता का पुर्वाभ्यास दिखता है । अतः पार्टी इस संशोधन प्रस्ताव के बिपक्ष मे है तथा इसका ब्यापक बिरोध करेगी । इस संशोधन प्रस्ताव के विपक्ष में रहनेवाले सभी दलों को संगठित कर संयुक्त रुप से संघर्ष करने हेतु पहल भी करेगी ।

संयुक्त लोकतान्त्रिक मधेशी मोर्चा एवं संघीय गठबन्धन ः 
नेपाल सद्भावना पार्टी संयुक्त लोकतान्त्रिक मधेशी मोर्चा एवं संघीय गठबन्धन का एक घटक दल होने के नाते मोर्चा तथा गठबन्धन द्वारा बिगत के दिनों में आयोजित बिभिन्न कार्यक्रमों मे सहभागिता जताती आयी है । मोर्चा द्वारा बिगत के दिनों मे मधेश मे जारी बिभिन्न आन्दोलन के कार्यक्रम में पार्टी के नेता तथा कार्यकर्ता सक्रियता के साथ नेतृत्व एवं सहभागिता जताई है ।

मधेश हीं नहीं काठमाण्डौ में भी हमारे स्थानिय नेताओं ने जिस प्रकार से आन्दोलन एवं अनशन के कार्यक्रम में सक्रिय सहभागिता दिखलायी वह काबिले तारिफ है एवं इसके लिए यह बैठक उन सभी के प्रति हार्दिक आभार प्रकट करती है । संयुक्त लोकतान्त्रिक मधेशी मोर्चा तथा संघीय गठबन्धन में पार्टी की सहयात्रा एवं भविष्य के कार्यक्रम के सम्बन्ध में आवश्यक एवं आकष्मिक निर्णय लेने का अधिकार पार्टी नेतृत्व को होना सही होता है ।

राजनीतिक सहकार्य एवं एकता ः 
नेपाल सद्भावना पार्टी जनभावना का सदैव सम्मान करती आयी है एवं इसी के तहत देश तथा मधेश के कई प्रबुद्ध राजनीतिज्ञ के साथ हीं मधेश राष्ट्र जनतान्त्रिक पार्टी (क्रान्तिकारी), संघीय सद्भावना पार्टी एवं ने.स.पा. सहित कइ दलों के बीच एकिकरण भी हुआ ।

समान उद्देश्य एवं धारणावाले दलों के साथ सहयात्रा के लिए पार्टी आज भी प्रतिबद्ध है तथा इस दिशा में अग्रसर भी है । पार्टी के संस्थापक नेता स्व. गजेन्द्र नारायण सिंह तथा बाबा राम जनम तिवारी द्वारा स्थापित मुल्य मान्यता एवं बिचारों का सम्मान करते हुए उनके द्वारा दिखाये गये राह पर पार्टी चलती आयी है तथा चलती रहेगी साथ हीं उनके द्वारा अग्रसारित विचारों पर बनी दलों को नेसपा में एकताबद्ध होने के लिए बैठक आह्वान करती है ।

संसद में दर्ता महाभियोग प्रस्ताव के सम्बन्ध मेंः
अख्तियार दुरुपयोग अनुसन्धान आयोग के प्रमुख आयुक्त श्री लोकमान सिंह कार्की के बिरुद्ध में संसद में दर्ता महाभियोग प्रस्ताव के सम्बन्ध में स्वयं महाभियोग प्रस्ताव दर्ता करानेवाले पक्ष के बीच से हीं परस्पर बिरोधी बयान सामने आ रहा है, हस्ताक्षरकर्ता हीं अपना हस्ताक्षर सक्कली नहीं होने का बयान दे रहे हैं और इस विषय पर राजनीतिक वहस तिब्र होती जा रही है । भ्रष्टाचार उन्मुलन, सुशासन एवं पारदर्शिता के प्रति नेसपा किसी भी तरह के सम्झौता के खिलाफ है ।

इस पर बडे दलों की दोहरी चाल को नेपाली जनता जरुर समझेंगे यह पार्टी का विश्वास है, नेपाल सद्भावना पार्टी का यह मानना है की अभी का समय संबिधान संशोधन कर हमारे द्वारा उठाए गए मांगो को संबोधन करने का है और संबिधान संसोधन के विषय पर बहस एवं छलफल होनी चाहिए । लेकिन हमारी मांगो एवं संबिधान संशोधन के विषय को ओझल में रख संबिधान संशोधन के विषय को विषयान्तर कर राजनीति को दिग्भ्रमित करने के लिए यह सारा प्रपंच किया जा रहा है ।

इस प्रकरण के प्रति सभी को सजग रहने की जरुरत है । हमारा यह मानना है कि संयुक्त लोकतान्त्रिक मधेशी मोर्चा तथा नेपाल सद्भावना पार्टी द्वारा विगत से उठाए जा रहे संबिधान संसोधन सम्बन्धि विषय से जनता का ध्यान अन्यत्र मोडने के कार्य को छोडकर मधेशी सहित आन्दोलनरत जनता के मांगो को सम्बोधन करने के लिए आवश्यक प्रकिृया को पुरा कर संविधान संसोधन प्रस्ताव संसद में दर्ता किया जाय एवं उसे पारित कर देश को एक नयी राजनीतिक दिशा प्रदान किया जाय ।

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